मेरी चाहतों की राह में, ना मज़हबी दीवार है
मेरा इश्क़ है मेरी बन्दगी, मेरा दैर कू-ए-यार है
(दैर : मंदिर, कू-ए-यार : lover की गली)

मुझे क्या ग़रज़ किसी रस्म से, क्या वास्ता रिवाज से
मेरी ज़िन्दगी हसीन हो, गर साथ तेरा प्यार है

तू जिस जगह मुझे छोड़ के, वक़्त के साथ चला गया
मुझे आज भी उसी मोड़ पे, तेरा हीं इंतिजा़र है

मेरे आशियें को फूंक के, मेरा गुलसिताँ बिखेर के
किस वास्ते ना जाने अब, मेरी जुस्तज़ू में बहार है
(आशियें : घर, फूंक के : जला के, जुस्तज़ू : तलाश)

तेरे अश्क़ की हर बुँद से, रिश्ता है मेरी आँख का
तुझे एक पल जो ग़म मिले, मेरी हर खुशी बेकार है

तुझे चाहना जुनून है, तुझे मांगना दुआ मेरी
ये जान कर ख़फ़ा न हो, मेरे दिल का तू क़रार है

नाज़ है इस बख़्त पे, मेरी ज़ीस्त का सिला मिला
ये पुछते हैं आज वो, किस शक़्स का मज़ार है
(बख़्त : क़िस्मत, ज़ीस्त : ज़िंदगी)

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sharma.nishu@gmail.com

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