मेरे चारागर मेरी बात सुन , मेरे दर्द की तू दवा न दे
मेरा दर्द हासिल-ए-इश्क़ है, मुझे ज़िंदगी की दुआ न दे
(चारागर : Doctor, हासिल-ए-इश्क़ : achievement of Love)

सब ज़ख़्म पुराने भर गए, कोई सितम नया अब दे मुझे
मुझे डर है मेरा ये ज़ब्त-ए-ग़म, तेरा हौंसला हिला न दे
(ज़ब्त-ए-ग़म : सहनशीलता (tolerance))

मुश्किल से संभला हूँ साक़ी , तू रोक ले मस्त निगाहों को
ये तेरा पिलाना रुक रुक के, कहीं प्यास मेरी बढ़ा न दे

ऐ आर्ज़ूओं, ऐ हसरतों, करो उस चमन की जुस्तजू
जहां रिवायतों की आंधियाँ, किसी फूल को डरा न दे
(जुस्तजू : तलाश (search), रिवायत : परम्परा (traditions))

यही सोंच के हीं मैं कभी, न हाले दिल सुना सका
मेरी उम्र भर की तश्नगी, एक पल में वो बुझा न दे
(तश्नगी : प्यास (thirst))

अपनी हथेली को इसी वास्ते, उसने देखा नहीं है अब तलक
कोई लकीर मेरे हक़ में कहीं, कोई फैसला सुना न दे

गर खुशी दफ़अतन मिल जाये तो, धड़कन भी रूक सकती है
कहीं आब-ए-हयात-ओ-लब वो अपने,मेरे होठों को पिला न दे
(दफ़अतन : अचानक (sudden), आब-ए-हयात-ओ-लब : होठों का अमृत)

अपने प्यार की राहें मुश्किल हैं, पर जीत मुअय्यन है अपनी
बस एक हीं बात से डरता हुँ मैं, तू हाथ छोड़ कर हरा न दे
(मुअय्यन : निश्चित)

तेरी बेवफ़ाई का ग़म तो है, मगर है खुशी इस बात से
इस ख़ौफ़ से मैं रिहा हुआ, तू नज़र से मुझको गिरा न दे

मुझे मालुम है तेरा ख़ंजर है ,और मेरे क़ातिल से तेरी है यारी
तू भरोसा तो कब का तोड़ चुका, अब कहीं दोस्त भी गंवा न दे

raise
sharma.nishu@gmail.com

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